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रोहित कुमार 'हैप्पी' | Rohit Kumar Happy - Haryanvi Poet, Haryanvi Writer, Journalist Haryanavi Biography and Literature
म्हारा हरियाणा : हरियाणवी लोक साहित्य, संस्कृति एवं भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु

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बाजरे की रोटी

बाजरे की रोटी ना थ्यावै कदै साग
हो गै परदेसी जणूं फूट्टे म्हारे भाग

सुणती कदे ना इब पायल की छम-छम
सुणै आड़ै रागणी अर्र ना कोए राग

आई तीज आड़ै जिब उडी ना पतंगां
होली, दीवाली ना खेल्लै कोई फाग

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हरियाणे का नाम बणावैं

दूध-दहीं हम मक्खण खांवैं
हरियाणे का नाम बणावैं
हरियाणे का नाम बणावैं

कुश्ती अर्र कबड्डी मैं हम
बडे-बड्यां नैं धूल चटावैं
हरियाणे का नाम बणावैं

देस के ऊपर मरण-मिटण नै
सबतै ऊपर नाम लिखावैं
हरियाणे का नाम बणावैं

हरयाणे के फौजी म्हारे
देश के ऊपर जान लुटावैं
हरियाणे का नाम बणावैं

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फेर तो मैं सूं राजी...

एक मेरा यार जो होग्या तीस पार
उसकी माँ नै मेरीतै बुलाया, बोल्ली-
रै आपणे यार नै समझा ले, समझा इसनै अख शादी रचा ले।

मैं अपणे यार नै कमरे मैं लेग्या अर्र मौका मिलतेंई उसके गल्ल हो ग्या-

-रै तन्नै के तकलीफ सै?
-शादी क्यूं नी करता?

वा बोल्या--जिस्सी छोरी चाहूं उसी मिलती कोना!
मैं बोल्या--किसी हूर की परी चाहवै म्हानै बी बता दे।

तो उसनै न्यूं बखान करया--

मल्लिका सी हाइट हो
खाती रोटी-राइस हो
दिल से ना टाइट हो
हर्र हरयाणे की पदाइश हो
फेर तो मैं सूं राजी...

चंदरावल सी सुंदर हो
झील जिस्सी आंख हों
लांबे-लांबे बाल उसके
हिरणी सी चाल हो
फेर तो मैं सूं राजी...

कोयल ज्यूं हो बोलती
मिसरी सी घोलती
हरियाणवी मै बतलाती हो
हँसती और हँसाती हो
फेर तो मैं सूं राजी...

 -रोहित कुमार 'हैप्पी'
   न्यूज़ीलैंड


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लाड सै, दुलार सै--दोगाना

लाड सै, दुलार सै
आँखां के मैं प्यार सै
छोड़ मत जाइयै तू
तों ही घर बार सै!
.....लाड सै, दुलार सै
     आँखां के मैं प्यार सै!!

छोड़ कै मैं जाऊं कोनी
झूठी बात बताऊं कोनी
बिन तेरे रै पिया
ज़िंदगी बेकार सै।
.....लाड सै, दुलार सै
     आँखां के मैं प्यार सै!!

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चल हाल रै उठ कै चाल...

चल हाल रै उठ कै चाल बड़ी सै दूर रै जाणा
उडै चाहे धूल
सै मंजल दूर
नहीं पर सै घबराणा
चल हाल रै उठ कै चाल बड़ी सै दूर रै जाणा

ना गौरी रूठ
ज्यागा दिल टूट
पडैगा फेर पछताणा
चल हाल रै उठ कै चाल बड़ी सै दूर रै जाणा

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हुड्डा हो, चौटाला हो

हुड्डा हो, चौटाला हो
कदै न घोटाळा हो
हाँ, कदै न घोटाळा हो.....

आपणे पराये का
आँखा म्ह ना जाला हो
हाँ, आँखा म्ह ना जाला हो.....

घर सबका सांझा रहै
कमरयां म्ह ना ताळा हो
हाँ, कमरयां म्ह ना ताळा हो.....

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लगा बुढेरा एक बताण

लगा बुढेरा एक बताण
आपस मै ना करो दुकाण
लगा बुढेरा एक बताण......

पडणा-लिखणा अच्छा हो सै
पर माणस की सीख पछाण
           लगा बुढेरा एक बताण......

देखा-परखा सै जग सारा
लाग रहे मेरे धौळे आण
          लगा बुढेरा एक बताण......

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