Warning: Undefined array key "dat" in /home/u207633836/domains/mharaharyana.com/public_html/authors_profile.php on line 16
म्हारा हरियाणा | Mhara Haryana Haryanavi Biography and Literature
म्हारा हरियाणा : हरियाणवी लोक साहित्य, संस्कृति एवं भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु

Author's Collection

[First] [Prev] 1 | 2

Total Number Of Record :15

सावन के हरियाणवी गीत

सावन मास हरियाणवी लोक-संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सावन मास में तीज का त्योहार हरियाणा में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है।

इस अवसर पर युवतियाँ व महिलाएं साज-श्रृंगार करती है व हाथों और पैरों पर मेंहदी लगाती है।  माता-पिता अपनी विवाहिता बेटियों के ससुराल वस्त्र व श्रृंगार की सामग्री भेजते हैं। तीज के त्यौहार पर बेटियों की अपने पिता के घर आने की प्रथा है।

...

More...

भैंसों की मुख्य नस्लें -  रामप्रसाद भारती

मुर्रा

मुर्रा के मुंह कान पर, होय सुनहरे बाल
सींग, मुडे़मा होयंगे देखो छल्ले चार।
देखो छल्लेदार होय यह रंग की कारी
छोटा मुख और कान पिछाई होये भारी।।
कहे भारती सत्य पूंछ को भूरा झुर्रा
उत्तर भारत की नस्ल दुधारू निकले मुर्रा।।


जाफरावादी

भारी ढीला हो बदन उभरो होय ललाट
विकसित पूरे अयन की करे दूध में ठाठ।
करे दूध में ठाठ बहुत ही खाये चारा
मिले कठियावाड़ क्षेत्र गिर जंगल सारा।
बड़े किच्च से सींग भारती रंग की कारी
होय जाफरावादी सीस गरदन हो भारी।


नीली रावी

धारी चेहरे पर मिले होय निलम्बी कान
मांट मोगर्रा में मिले फाजिल्खां मुल्तान।
फाजिल्खां मुल्तान बीच उत्तल के रेखा
नीचे धसो ललाट भोरी नीली का देखा।
छोटे-मोटे सींग भारती भूरी कारी
मध्यम कद अति दूध मिले पैरों पर धारी।


मेहसाना

पायी मेहसाना गयी पाटन कांठी कैल
भोरी दुधारू पालते बीजापुर के छैल।
बीजापुर के छैल भारती मुहरा चौड़ा
दोनों नथुने खुले सींग हंसिया का जोड़ा। 
मध्यम कद की भोरी मिलेगी रंग से काली
लम्बी गरदन होय दूध हित जाये पाली।


भदावरी

छोटा मुख हो भारती कान खुरदरे संग
घी में निकले श्रेष्ठ ये तांबे जैसा रंग।
तांबे जैसा रंग बाह की भोरी गठीली
लम्बी पतली पूंछ भैंसि की मिले लचीली।
होय कि श्याम से सींग औसतन होवे मोटा
मध्यम कद की भैंसि अयन होता है छोटा।

 
नागपुरी

छोटी काया भारती काला रंग विचित्र
नागपुरी को देखिये नागपुर में मित्र।
नागपुर में मित्र जाय वरदा में पाली
भूरे धब्बेदार टांग मुख पूंछ निराली।
चपटे लम्बे सींग दूध में पायी खोटी
लम्बा चेहरा गला पूंछ होती है छोटी।


टोडा

पाई ऊटी भारती लम्बा होय शरीर
चेहरा गरदन भाल पर काली मिले लकीर।
काली मिले लकीर होय सिर इसका भारी।
मिलते वीणाकार सींग की महिमा न्यारी।
भूरो धूसर रंग दूध कम लेकर आयी
भूरे रंग की दो फीत गले टोडा के पायी।


- रामप्रसाद भारती
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा

साभार- दुग्ध-गंगा, २०१०-२०११


...
More...

झूलण आळी | लोकगीत

झूलण आळी बोल बता के बोलण का टोटा
झूलण खातर घाल्या करैं सैं पींग सामण में
मीठी बोली तेरी सै जणो कोयल जामण में
तेरे दामण में लिसकार उठै चमक रिहा घोटा
झूलण आळी बोल बता के बोलण का टोटा

लरज लरज कै जावै से योह जामण की डाळी
पड़ के नाड़ तुडा लै तैं रोवै तन्नै जामण आळी
तेरे ढुंगे पै लटकै काला नाग सा मोटा
झूलण आळी बोल बता के बोलण का टोटा

...

More...

हरियाणा के प्राचीन नगर | Ancient Cities of Haryana

यूँ तो हरियाणा में विभिन्न नगर हैं किंतु हम यहाँ हरियाणा के प्रमुख प्राचीन नगरों का उल्लेख कर रहे हैं:

  • कुरूक्षेत्र
  • थानेसर (स्थाण्वीश्वर)
  • पानीपत
  • रेवाड़ी
  • हिसार
  • शाहबाद मारकण्डा
  • लाडवा
  • यमुनानगर
  • जगाधरी
  • बिलासपुर
  • सुध
  • पंचकूला
  • जीन्द
  • महेन्द्रगढ़
  • बल्लभगढ़
  • पलवल
  • होडल
  • गुड़गांव
  • कैथल
  • करनाल
  • फरीदाबाद
  • सिरसा
  • सोनीपत
  • गोहाना
  • बहादुरगढ़
  • रोहतक
  • अम्बाला
  • झज्जर
  • फर्रूखनगर

...

More...

फागुण के हरियाणवी लोक गीत | Fagun Geet

यहाँ फागुण से संबंधित लोकगीत संकलित किए गए हैं जो फागुण, फाग व होली के अवसर पर गाए जाते हैं। यदि आपके पास भी कुछ गीत उपलब्ध हों तो अवश्य 'म्हारा-हरियाणा' से साझा करें।

विश्वास है पाठकों को ये 'फागुण के हरयाणवी लोक गीत' पसंद आएंगे।

...

More...
[First] [Prev] 1 | 2

Total Number Of Record :15

सब्स्क्रिप्शन

ताऊ बोल्या

Mhara haryana