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हरियाणवी ग़ज़लें
à¤à¤• अचà¥â€à¤›à¥€ परिपूरà¥à¤£ ग़ज़ल कहने के लिये ग़ज़ल की कà¥à¤› आधार बातें समà¤à¤¨à¤¾ जरूरी है जो संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥â€à¤¤ में इस पà¥à¤°à¤•ार हैं - ग़ज़ल- à¤à¤• पूरà¥à¤£ ग़ज़ल में मतà¥â€à¤²à¤¾, मकà¥â€à¤¤à¤¾ और 5 से 11 शेर (बहà¥à¤µà¤šà¤¨ अशआर) पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ में हैं। यहाठयह à¤à¥€ समठलेना जरूरी है कि यदि किसी ग़ज़ल में सà¤à¥€ शेर à¤à¤• ही विषय की निरंतरता रखते हों तो à¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤•ार की ग़ज़ल बनती है जिसे मà¥à¤¸à¤²à¥â€à¤¸à¤² ग़ज़ल कहते हैं हालॉंकि पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ गैर-मà¥à¤¸à¤²à¥â€à¤¸à¤² ग़ज़ल का ही अधिक है जिसमें हर शेर सà¥â€à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° विषय पर होता है।
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