Warning: Undefined array key "dat" in /home/u207633836/domains/mharaharyana.com/public_html/lit_details.php on line 45
हरियाणवी ग़ज़ल | सतपाल स्नेही | Haryanvi Ghazal by Satpal Snehi
म्हारा हरियाणा : हरियाणवी लोक साहित्य, संस्कृति एवं भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु
रचनाकार:

 सतपाल स्नेही

क्यूँ अपणे हाथों भाइयाँ का लहू बहावै सै
क्याँ ताहीं तू इतना एण्डीपणा दिखावै सै

जाण लिये तू एक दिन इसमै आप्पै फँस ज्यागा
जाल तू जुणसा औराँ ताही आज बिछावै सै

इस्या काम कर जो धरती पै नाम रहै तेरा
बेबाताँ की बाताँ मैं क्यूँ मगज खपावै सै

जिसनै राख्या बचा-बचा कै आन्धी-ओळाँ तै
उस घर मैं क्यूँ रै बेदर्दी आग लगावै सै

छैल गाभरू हो होकै इतना समझदार होकै
क्यूँ अपणे हांगे नै तू बेकार गँवावै सै 

हरियाली अर खुशहाली के इस हरियाणे मै
क्यँ छोरे ‘सतपाल’ दुखाँ के गीत सुणावै सै

-सतपाल स्नेही
 बहादुरगढ़-124507 (हरियाणा)

 साभार - हरिगंधा

Back

सब्स्क्रिप्शन

ताऊ बोल्या

Mhara haryana