म्हारा हरियाणा : हरियाणवी लोक साहित्य, संस्कृति एवं भाषा
एक गंजा एक नाई तै बोल्या - मेरे सिर पै तो बहुत कम बाळ सैं, तन्नै कम पिस्से लेणे चाईंयै।
नाई बोल्या - यैं पिस्से बाळ काटण के कोनी बाल टोण के मांगे सैं।